देहारादून

रिस्पना नदी खनन माफियो के हवाले

रिस्पना नदी खनन माफियो के हवाले

पूर्व मुख्य मंत्री हरीश रावत की करोडो की सीवर योजनाएं हुई धराशाही

DEHRADUN (सुभाष कुमार)

वैश्विक महामारी को लेकर आज जब पूरा देश संकट के दौर से गुजर रहा है तो ऐसे में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को अन्य राज्यो के मुख्य मंन्त्रियो के भांति बचाव कार्यों में जुट जाना चाहिए था।इसके विपरीत रिस्पना नदी को खनन माफियो के हवाले करके करोड़ो रूपये की सीवर योजना को मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार ध्वस्त करने में जुटी हैं। आज स्थिति ये है कि रिस्पना के नाम से इस नदी को आबाद कराने का कभी संकल्प लेने वाले त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक बार जानने की कोशिश भी नही की और सरकार के नुमाइंदे खनन माफियो को बढ़ावा दे रहे है।

पिछले 20 दिनों में खनन माफियों द्वारा नदी को गलत तरीके से खोद खोद कर वहाँ लगे करोड़ा की सीवरेज योजना को एक झटके में ही तहस नहस कर डाला। इस पर अपर राजीव नगर ,डांडा धर्मपुर की जनता ने सरकार की नीतियों का जम कर विरोध करते हुए खनन का काम रोके जाने पर जोर दिया।

पिछले 20 दिनों में खनन माफियों द्वारा नदी को गलत तरीके से खोद खोद कर वहाँ लगे करोड़ा की सीवरेज योजना को एक झटके में ही तहस नहस कर डाला। इस पर अपर राजीव नगर ,डांडा धर्मपुर की जनता ने सरकार की नीतियों का जम कर विरोध करते हुए खनन का काम रोके जाने पर जोर दिया।
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष मुख्य मन्त्री द्वारा राजधानी देहरादून में रिस्पना बिंदाल व अन्य नदियों को पुनर्जीवित करने व उसके उत्थान हेतु मुहिम छेड़ी गयी थी नदियों के किनारे किनारें सैकड़ो पौधे लगाए जाने का संकल्प लिया गया था परन्तु कुछ दिन के बाद मुख्यमंत्री की सारी योजनाए हवा हो गयी। अब जब कोरोना संक्रमण से पूरा देश संकट में है और लॉक डाऊन में जीवन चक्र चल रहा तो ऐसे में नदियों में खनन करवाकर उसके उत्थान के लिये मुख्यमंत्री आखिर कौन सा कारनामा दिखाने जा रहे है ये बात गले नही उतर पा रही है। मगर सत्यता तो ये है की जनता की आंख में धूल जौँख कर खनन के नाम पर करोड़ो रूपये का खेल खेला जा रहा है। सरकार के इस प्रपंच से राज्य को कोई फायदा होने वाला नही है। बल्कि खनन माफियो ने जिस प्रकार नदियों को जगह जगह खोदा है उससे नदियों में करोड़ो की सीवर योजना धराशाही हो गयी है इसका दुष्प्रभाव बरसातों में देखने को मिलेगा। क्षतिग्रस्त पुश्ते व नदियों की बदहाल स्थिति अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है।

administrator

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *