कविता : गांव की बातें गांव में रह गईं 

कविता : गांव की बातें गांव में रह गईं 

डेक की कैसेट नाली में बह गईं ।
गांव की बातें गांव में रह गईं ।।
रेडियो और पुरानी टीवी ।
डिस्क के सारे तार भी सड़ गए ।।
जमीन के नीचे लाइन पड़ गई ।
गली के सारे खंभे उखड़ गए ।।
न रही दीवाली पुरानी ।
न होली का मिलना रह गया ।।
जिन कुओं से पानी भरते थे ।
उन कुओं के ऊपर पत्थर जड़ गए ।।
हाय रे जीवन , जीवन उजड़ा ।
दोस्त पुराने सारे बिछड़ गए ।।
जब भी गांव जाता हूं ।
कोई नहीं अब मिलता है ।।
किससे बताऊं ये सारी कहानी
दोस्त तो सारे कमाने निकल गए ।।
लेखक एवं राष्ट्रीय कवि –
जीतेन्द्र कानपुरी (टैटू वाले)

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